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NOIDA: सड़क छोड़ प्रेरणा स्थल पहुंचे किसान: क्या यह है Plan B का हिस्सा या जल्द होगा बड़ा प्रदर्शन? जानें क्या हैं पूरा मामला?

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नोएडा, उत्तर प्रदेश: Plan B के तहत हजारों किसान नोएडा के महामाया फ्लाईओवर और दादरी-नोएडा लिंक रोड से हटकर प्रेरणा स्थल में डेरा डाल चुके हैं। सोमवार को प्रशासन की अपील के बाद किसानों ने सड़क खाली करने का फैसला किया, लेकिन उनकी रणनीति और मांगें संकेत देती हैं कि यह विरोध प्रदर्शन जल्द खत्म होने वाला नहीं है।

प्रेरणा स्थल पर रुकना किसानों के Plan B का हिस्सा है। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो वे किसी भी समय सड़कों पर लौटने को तैयार हैं। इसके जरिए किसान अपनी आवाज को और प्रभावी बनाने और सरकार पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।


क्या है किसानों का Plan B?

किसान यूनियन ने प्रशासन को 7 दिनों का समय दिया है। उनका कहना है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे तुरंत सड़कों पर लौट आएंगे।

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प्रेरणा स्थल पर रुके किसानों में से कुछ ने हवन करते हुए प्रार्थना की कि सरकार को सद्बुद्धि मिले। एक किसान ने कहा, “हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें पूरी करवाना चाहते हैं।” लेकिन उनकी यह तैयारी दर्शाती है कि वे Plan B के तहत पूरी रणनीति बनाकर आए हैं।


प्रशासन ने मांगा समय, किसानों ने दिया अल्टीमेटम

प्रशासन ने किसानों से 3-4 दिनों का समय मांगा है ताकि उनकी समस्याओं पर चर्चा की जा सके। दूसरी ओर, किसानों ने 7 दिनों का समय देकर साफ संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो उनका अगला कदम विरोध को और तेज करना होगा।

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नोएडा प्राधिकरण के मुख्य सचिव के साथ किसानों की बैठक की योजना बनाई गई है। इसमें उनकी समस्याओं और संभावित समाधान पर चर्चा की जाएगी।


प्रेरणा स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

गौतमबुद्ध नगर जिले के प्रेरणा स्थल के आसपास भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है। बीती रात करीब 300 किसान स्थल पर रुके थे, और मंगलवार सुबह से अधिक किसानों का वहां पहुंचना जारी है। गाड़ियों में भर-भरकर किसान प्रेरणा स्थल आ रहे हैं।

सुरक्षा बल यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि प्रदर्शन किसी भी प्रकार से अशांत न हो।


आंदोलन के अगले चरण की तैयारी

यह स्पष्ट है कि किसान केवल अस्थायी रूप से प्रेरणा स्थल पर रुके हैं। किसानों ने प्रशासन और सरकार को साफ तौर पर चेतावनी दी है कि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे दिल्ली की ओर कूच कर सकते हैं।

6 दिसंबर से पंजाब के किसान भी दिल्ली कूच करने की तैयारी में हैं। ऐसे में सरकार को दो बड़े किसान आंदोलनों का सामना करना पड़ सकता है।


नेतृत्व में दिख रही है रणनीतिक खामोशी

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करते हुए कोई एक बड़ा नेता फिलहाल सामने नहीं आया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, राकेश टिकैत इस आंदोलन को मार्गदर्शन दे रहे हैं। 25 नवंबर की महापंचायत में राकेश टिकैत की मौजूदगी से यह संकेत मिला था कि आंदोलन व्यापक स्तर पर होगा।

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प्रेरणा स्थल पर जुटे किसानों ने यह भी संकेत दिया है कि वे लंबे समय तक रुकने के लिए पूरी तैयारी के साथ आए हैं। खाने-पीने का इंतजाम और अन्य जरूरी सामग्रियों के साथ उनका डेरा स्थल पर बना हुआ है।


सरकार के लिए बढ़ती चुनौती

किसानों का यह विरोध प्रदर्शन सरकार के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन सकता है। 7 दिनों के अल्टीमेटम के साथ यह प्रदर्शन और व्यापक हो सकता है। खासतौर से जब पंजाब के किसान भी विरोध में शामिल हो जाएंगे, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।


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