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Sambhal: जामा मस्जिद सर्वे पर क्यों भड़की राजनीति, नेताओं को रोका गया और प्रशासन ने लगाई धारा-144?

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संभल, उत्तर प्रदेश: यूपी के Sambhal में जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के बाद से विवाद और हिंसा का माहौल है। अदालत के आदेश पर 19 नवंबर को मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण हुआ था। याचिका में दावा किया गया है कि जामा मस्जिद की जगह पहले हरिहर मंदिर हुआ करता था। इस सर्वेक्षण के विरोध में 24 नवंबर को हिंसा भड़क उठी, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई और 25 से अधिक लोग घायल हुए।


सपा प्रतिनिधिमंडल को रोकने पर बढ़ा विवाद

समाजवादी पार्टी (सपा) का 15 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल हिंसा की जांच के लिए 30 नवंबर को संभल जाने वाला था। लेकिन जिला प्रशासन ने संभल में धारा 144 लागू कर बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगा दी। सपा नेताओं को उनके घरों से निकलने नहीं दिया गया, जिस पर अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा:
“संभल में हिंसा रोकने में प्रशासन पूरी तरह फेल हुआ। प्रतिबंध लगाकर असली दोषियों को बचाने का प्रयास हो रहा है। भाजपा सरकार को सच्चाई का सामना करना चाहिए।”


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सपा नेताओं की गिरफ्तारी और सड़क पर विरोध

नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने लखनऊ से संभल जाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में रोक दिया। उन्होंने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा, “संभल में धारा 144 लगी है, तो हमें लखनऊ में क्यों रोका जा रहा है?”

सपा ने कहा कि यह कदम लोकतंत्र के खिलाफ है। प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने इसे “लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन” बताया।


कांग्रेस का भी हस्तक्षेप

कांग्रेस ने भी इस मामले में रुचि दिखाई है। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने 2 दिसंबर को कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल संभल भेजने की घोषणा की। उनका कहना है कि इस हिंसा की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए।


प्रशासन का पक्ष

संभल के डीएम राजेंद्र पेसीया ने स्पष्ट किया कि जिले में शांति बनाए रखने के लिए बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर 10 दिसंबर तक रोक लगाई गई है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति जिले में प्रवेश नहीं कर सकता।

डीएम ने हिंसा की जिम्मेदारी लेते हुए भरोसा दिलाया कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


आगे की रणनीति

सपा के मुताबिक, उनका प्रतिनिधिमंडल इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अखिलेश यादव को सौंपेगा। इसमें प्रदेश सरकार की विफलता को उजागर किया जाएगा।

प्रमुख सदस्य:

  • माता प्रसाद पांडेय
  • लाल बिहारी यादव
  • हरेंद्र मलिक
  • जियाउर्रहमान बर्क

विवाद का भविष्य

संभल में हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। मस्जिद सर्वेक्षण के बाद फैली हिंसा और राजनीतिक बयानबाजी से माहौल और गर्म हो गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन शांति स्थापित करने में कितना सफल होता है और विपक्ष सरकार पर कितनी जिम्मेदारी डालता है।


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