वॉशिंगटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के प्रमुख उम्मीदवार Donald Trump ने एक बार फिर धमकी भरे अंदाज में ब्रिक्स देशों (भारत, चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका) को चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ये देश अमेरिकी डॉलर के बिना किसी नई करेंसी में व्यापार करते हैं, तो उन्हें 100% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।
सोशल मीडिया पर खुला बयान
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा,
“ब्रिक्स देशों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अमेरिकी डॉलर को हटाने की कोशिश न करें। अगर उन्होंने ऐसा किया, तो उन पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा, और अमेरिकी बाजार से उनका बहिष्कार होगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी देश जो अमेरिकी डॉलर की जगह लेने की कोशिश करेगा, उसे अमेरिकी बाजार को अलविदा कहना होगा।
ब्रिक्स करेंसी से क्यों डर रहे हैं ट्रंप?
ब्रिक्स समूह के सदस्य देशों ने हाल ही में एक नई करेंसी बनाने की संभावना पर चर्चा की है, जिसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार में डॉलर पर निर्भरता को कम करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ब्रिक्स नई करेंसी लॉन्च करता है, तो यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
ट्रंप के बयान से यह स्पष्ट है कि वह अमेरिकी आर्थिक प्रभुत्व को बनाए रखने के लिए आक्रामक कदम उठाने की तैयारी में हैं।
कनाडा और मैक्सिको पर भी निशाना
ट्रंप ने न केवल ब्रिक्स देशों बल्कि अपने पड़ोसी देशों कनाडा और मैक्सिको को भी धमकी दी। उन्होंने कहा कि यदि ये देश अमेरिका में ड्रग्स और अवैध प्रवास को नहीं रोकते, तो उनके उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाया जाएगा।
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने ट्रंप की इस धमकी को गंभीरता से लेने की बात कही। कनाडा ने इस साल के पहले नौ महीनों में अमेरिका को $300 बिलियन से अधिक का सामान निर्यात किया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ट्रंप की इस धमकी पर दुनिया भर में प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
- चीन ने इसे ‘आर्थिक आक्रमण’ करार दिया।
- भारत में विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम वैश्विक व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
- रूस ने इसे अमेरिका की वैश्विक प्रभुत्व की कोशिश बताया।
क्या होगा अमेरिका का अगला कदम?
अगर ट्रंप 2024 में राष्ट्रपति चुने जाते हैं, तो यह साफ है कि वह अमेरिका फर्स्ट नीति को और आक्रामक बनाएंगे। उनकी रणनीति से न केवल ब्रिक्स देशों बल्कि अमेरिका के ट्रेड पार्टनर्स को भी मुश्किलें हो सकती हैं।
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यह मामला आने वाले समय में वैश्विक व्यापार और राजनीति के लिए बड़ा मुद्दा बन सकता है। सवाल यह है कि क्या ब्रिक्स देश ट्रंप की इस धमकी का जवाब देंगे या अमेरिकी बाजार को छोड़ने का विकल्प चुनेंगे?
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